50 मोहब्बत शायरी | दीवानगी | इश्क़ | प्यार भरी शायरी

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मोहब्बत शायरी , प्यार भरी शायरी , दीवानगी, इश्क़ और प्रेम भरी शायरी का ज़बरदस्त टॉप 50 कलेक्शन। अपने प्यार को लफ़्ज़ों में बंया करे शायरी के ज़रिए।

मोहब्बत, दीवानगी , इश्क़, प्यार भरी शायरियाँ

सुलगते रहते है तेरी याद में हम…
और लोग पूछते है हमे ठंड क्यों नहीं लगती…

कोई तो है हमारे अंदर जो हमें सँभाले हुए हैं,
कि बे-क़रार से रह कर भी, बर-क़रार है हम..

इतनी मिलती है मेरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझको मिरा महबूब समझते होंगेl

आज उसका दीदार हो गया,
क्या कहूं इश्क फिर सवार हो गया l

ये कैसा ख्याल है तेरा, जो मेरा हाल बदल देता है,
तू दिसम्बर की तरह है, जो पूरा साल बदल देता है..!

मरते होंगे तुम्हें देखकर हज़ारों;
हम तो जीते हैं,,,, तुम्हें देखकर….

उसने पूछा……दीवानगी क्या होती हैं;
हमनें कहा,,,,दिल तुम्हारा,,,, हुक़ूमत हमारी…!!

नज़र-अंदाज़ तो उन्हें करूं; जो नज़रों के सामने हो…!!
उनका क्या करूं, जो दिल में छुपे बैठे हैं…!!

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नाम तुमको दिया है
हमने सुकून का,
फिर क्यों हर घड़ी
बेचैन किए रहते हो,,,,

इश्क़ की मंज़िल नहीं होती….
बस सफ़र ही ख़ूबसूरत होता है…

हम मोहब्बत में नही”
शायरी से जीते है,
इश्क को स्याही वनाकर
लफ्जो में लिख देते हैं

कभी सुर्ख है कभी स्याह हैं,
एक कतरा तुम्हारी मोहब्बत का…
कभी जरा सा कभी बेपनाह है,
एक कतरा तुम्हारी मोहब्बत का…
कभी लाज़िमी कभी खामख्वाह है
एक कतरा तुम्हारी मोहब्बत का..
कभी बेला कभी महकता गुलाब है
एक कतरा तुम्हारी मोहब्बत का..

आ जाओ, थाम लो सर्द हथेलियाँ मेरी,
इस दिसंबर मैं, दस्तानें नहीं पहनना चाहता….

कुछ तो कुदरत ने उनका हुस्न भी कातिल कर दिया
एक तो गोरा रंग उसमें तिल भी शामिल कर दिया

बांध लूं तुम्हें ये तमन्ना नहीं,
मगर बंध जाऊं तुमसे ये आरज़ू जरूर है…!

बाहों में कुछ इस तरह समेट लो मुझे!
ज़िंदगी के ग़मों का होश न रहे…!!

बस आखिरी बार इस तरह मिल जाना…
मुझ को रख लेना या मुझ में रह जाना

अपने शब्दों से ही उतर जाऊँगा ज़हन में तुम्हारे….
वो निगाहें, वो हुस्न, वो मुलाकात की मुझे जरूरत नही..

मुझे रहेगा इंतज़ार तमाम उम्र तेरा,
इश्क़ मुझे तुझसे ही नहीं , तेरे होने से भी है ।

“मुहब्बत के लिए इक ज़िंदगी कम पड़ गयी होगी;
तभी तो सात जन्मों का खुदा ने कर दिया बंधन।”

हम तराश देंगे तुमको..
इस कदर लफ्जों मे …
की हमारी शायरी में सिर्फ..
तुम्हारा ही किस्सा होगा..

अगर कोई ज़ोर दे कर पूछेगा ….हमारी मौहब्बत की कहानी
तो हम भी धीरे से कहेंगे…………मुलाक़ात को तरस गए ।।

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“पसंद नहीं हमे भी कोई आसान मोहब्बत
मेरा हमदम भी सैलाब-ए-समुंदर है।

ढाया है खुदा ने ज़ुल्म हम दोनों पर,
तुम्हें हुस्न देकर मुझे इश्क़ देकर।

शब्दों में बताना आसान नही के
क्या होता है प्यार..!!
शब्द जब कानों की जगह दिल मे उतर जाए
शायद यही होता है प्यार….!!!

दस्तक और आवाज़ तो कानों के लिए है;
जो रूह को सुनाई दे,,,,
उसे मोहब्बत कहते हैं…!!

क्या खूब कतल का तरीका तूने इज़ात किया..!
मर जाऊं हिचकियों से ही इस कदर तूने याद किया..!!

इस तरह दिल में समाओगे मालूम न था,
दिल को इतना तड़पाओगे मालूम न था,
सोचा था कि दूर हो तो याद तो आओगे,
मगर इस कदर याद आओगे मालूम न था।

तुमसे मिलके इमली मीठी लगती है,
तुमसे बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है।।

कभी पलकें नीची…कभी साँस गहरी भरना…!
तुम सिखाते हो मुझे…अदाओं से मोहब्बत करना..!

दबी हुई थी जो बातें दिल में वो बाहर आ रही है…!!
मेरी मासूम सी मोहब्बत शायरी में मुस्कुरा रही है..!!

खता इश्क की हुई है तो सजा भी आशिकाना हो
उम्र कैद की सजा हो और तुम्हारा दिल कैदखाना हो

याद तुम्हारी सावन सी
और प्रेम हमारा सारस सा।
तुम घाट “प्रिये” काशी तट के
और स्नेह हमारा बनारस सा.

आ तेरे इश्क़ का
हिसाब कर दुं मैं…
दूं इतनी मोहब्बत…
तुम्हें बेहिसाब कर दुं मैं।।।

चले भी आओ तसव्वुर में मेहरबां बनकर;
आज इंतज़ार तेरा, दिल को हद से ज्यादा है!

थोड़ी जगह दे दो मुझे;
तेरे पास कहीं रह जाऊं मैं,,,,
खामोशियां तेरी सुनूं मैं,,,,
और दूर कहीं ना जाऊं मैं,,,,

कौन कमबख्त
निग़ाहों का
पाबन्द है
दीदार के लिये,
हम आशिक़ हैं
हमारी रूह काफ़ी है
वस्ल-ऐ-यार के लिये…….!!

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